EWS के लिए 75 में पास की मांग -समता के अधिकार का उल्लंघन माना जा रहा सामान्य के समान अंक।

मप्र शिक्षक पात्रता परीक्षा में आर्थिक रूप से पिछडे हये अभ्यर्थियों का मप्र शासन द्वारा संविधान से प्रदत्त अनुच्छेद – 14 में वर्णित समता का अधिकार का हनन कर रही है । यह चिंता व्यक्त करते हुये पियूष पाण्डेय टीजीटी अंग्रेजी जेएनव्ही चुरहट ने आगे कहा है कि मप्र सामान्य प्रशासन मंत्रालय के विभाग द्वारा जारी पत्र क्र . एफ / 07 / 11 / 2019 / एक / 02 / 07 / 2019 और 22 / 11 / 2019 में वर्णित किया गया है कि आर्थिक रूप से पिछड़े हुये अभ्यर्थियों को वही सुविधायें दी जायेंगी जो सुविधा मप्र लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण ) अधिनियम 1994 की धारा – 2 ( ख ) में वर्णित है लेकिन इस शिक्षक भर्ती में एससी / एसटी और ओबीसी के लिये 75 अंक जबकि ईडब्ल्यूएस लिये 90 अंक मानकर नियुक्ति दी जानी है । जो माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरूद्ध भी है । माननीय सप्रीम कोर्ट जस्टिस इंदिरा बनर्जी और संजीव खन्ना की अवकाश पीठ 114 / 05 / 2019 को निर्णय दे चुके हैं कि किसी भी पात्रता परीक्षा में आरक्षण एक गलत अवधारणा है बल्कि आरक्षण का सवाल तो नियुक्तियां या दाखिला के समय आना चाहिए । मप्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मप्र राजपत्र क्रमांक 530 दिनांक 24 . 12 . 2019 को राजपत्र प्रकाशित कर एससी / एसटी / ओबीसी और ईडब्ल्यएस को ऊध्वाधर आरक्षण में ला चुका है । एससी / एसटी / ओबीसी और ईडब्ल्यूएस चारों ऊर्ध्वाधर आरक्षण हैं । शुरू के तीन के लिये उत्तीर्ण अंक 75 है जबकि ईडब्ल्यूएस के लिये 90 अंक । जो ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों के साथ सरासर अन्याय है और संवैधानिक हनन के साथ – साथ अनुच्छेद – 14 में वर्णित समता का अधिकार का हनन है । इस तरह से मप्र शासन स्कूल शिक्षा विभाग भी ईडब्ल्यूएस को 75 अंक मानकर नियुक्ति के लिये काउंसलिंग का मौका दे सकती है । उधर जानकारों का कहना है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र तैयार कराने में भी संबंधितों को भारी दिक्कतों से गुजरना पड़ रहा है । प्रमाण पत्र बनाने से जुड़ा राजस्व अमला सहयोग करने की बजाय इसको और भी पेचीदा बनाने में जुटा हुआ जिससे भटकने के बाद भी काम समय पर न हो सके । स्थिति यह है कि तहसीलों में लगातार भटकने के बाद भी लोगों का कार्य नहीं हो पा रहा है । वहीं हल्का पटवारियों की मनमानी भी चरम पर पहुंच चुकी है ।

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