RTE के नियमानुसार विज्ञान को प्राथमिकता न देने के बाद भी अधिकारियों के बयान -कर रहे हैं पालन।

विज्ञान विषय को मिडिल स्कूल में rte के नियम के अनुसार प्रथम स्थान पर गणित के साथ रखा गया है।

परन्तु मध्यप्रदेश में अपने मनमाने तरीके से शिक्षा में जुगाड़ फार्मूला अपनाया जा रहा है।

कहीं कोई अधिकारी कहता है कि हिंदी तो कोई भी पढा लेगा तो कहीं कोई अधिकारी बयान देता है कि गणित बाला विज्ञान पढा देगा ।

जबकि rte के नियमों में विज्ञान विषय को गणित के साथ बराबर की प्राथमिकता दी गई है।

आरटीई में विज्ञान – गणित एक साथ पहले स्थान पर छात्रों के संख्या के हिसाब से विज्ञान विषय के माध्यमिक भर्ती में विभाग ने विज्ञान विषय को पांचवां स्थान दिया है । पांचवें नंबर पर विज्ञान विषय का पद उस स्थिति में रिक्त माना जाएगा , जब संबंधित स्कूल में छात्रों की संख्या 140 से 175 होगी । इससे कम संख्या वाले स्कूल में भी विज्ञान विषय के शिक्षक नियुक्त नहीं होंगे । जबकि आरटीई के एक्ट में विज्ञान और गणित विषय संयुक्त रूप से पहले स्थान पर है । यह जानते हए भी विभाग ने गणित को तो पहले स्थान पर रखा , लेकिन विज्ञान को पांचवें स्थान पर डाल दिया । इससे उम्मीदवार यह विश्वास जता रहे हैं कि माध्यमिक स्कूलों को विज्ञान विषय के शिक्षक मिलना मुश्किल है ।

एक लाख से अधिक उम्मीदवारों ने दी परीक्षा फरवरी 2015 में माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई । विज्ञान विषय की परीक्षा 7 शिफ्टों में हुई । इसमें 1 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए ।

सुधार के लिए दिया ज्ञापन . . स्कूल शिक्षा विभाग के सर्कुलर के खिलाफ सुशील मेहरा द्वारा मन हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई । जस्टिस विशाल धगत ने सुनवाई करते हुए 17 दिसंबर 2019 को जवाब मांगा था , जो प्रस्तुत नहीं किया गया । इसी संबंध में विज्ञान विषय के विक्रम राठौड़ , कैलाशचंद चारेल , संतोष परमार आदि उम्मीदवारों ने संचालनालय में ज्ञापन दिया है ।विज्ञान विषय के सम्वन्ध में अगली सुनवाई 10 फरवरी को संभावित है।

अधिकारियों के जबाब

भर्ती प्रक्रिया में rte का उल्लंघन किसी भी स्तर पर नहीं किया गया है । हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है । जल्द ही सभी दिशा – निर्देश जारी कर दिए जाएंगे । – जयश्री कियावत , आयुक्त लोक शिक्षक संचालनालय

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