Nios की मान्यता Nios Affiliation है तो अन्य बोर्ड की मान्यता की जरूरत नहीं -हाइकोर्ट।

पंजाब – हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्टडी सेंटर के पास नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग ( एनआईओएस ) की मान्यता है तो उसे किसी अन्य बोर्ड से मान्यता की आवश्यकता नहीं है । हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए रेवाड़ी की जनता कल्याण समिति ने एनआईओएस द्वारा मान्यता वापस लेने के 10 नवंबर 2016 के आदेश को चुनौती दी थी ।

याची ने बताया कि उसे 1990 में सीनियर सेकेंडरी तक के छात्रों को प्रवेश देने के लिए स्टडी सेंटर हेतु मान्यता दी गई थी । इसके बाद अचानक 20 अगस्त 2015 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और कहा गया कि उनको किसी राष्ट्रीय या राज्य शिक्षा बोर्ड से मान्यता नहीं है और उनका इंफ्रास्ट्रक्चर भी अधूरा है । याची ने कहा कि जब एनआईओएस ने खुद उन्हें मान्यता दी है तो किसी अन्य बोर्ड की मान्यता की जरूरत नहीं है । याची ने बताया कि एनआईओएस ने प्रासपेक्टस में तीन राष्ट्रीय बोर्ड मान्य बताए थे जिनमें वह भी शामिल है । ऐसे में किसी अन्य बोर्ड से एफिलिएशन न होने की दलील देते हुए मान्यता वापस नहीं ली जा सकती ।

इसके साथ ही याची ने कहा कि 2013 की इंस्पेक्शन में इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा न होने की बात कही गई है जबकि ऐसी कोई रिपोर्ट याची को दी ही नहीं गई । हाईकोर्ट ने याची और प्रतिवादी पक्ष को सुनने के बाद एनआईओएस को कड़ी फटकार लगाई । कोर्ट ने कहा कि यह दलील देना कि किसी अन्य बोर्ड से एफिलिएशन नहीं है हास्यास्पद है । यह तो ऐसा ही हुआ कि सीबीएसआई से एक्रिडेशन के बाद राज्य शिक्षा बोर्ड से एफिलिएशन अनिवार्य करना । साथ ही कोर्ट ने कहा कि इंस्पेक्शन में सामान्य आरोप लगाए गए हैं और कमियों का कोई जिक्र नहीं है । साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्कूल ओर स्टडी सेंटर में फर्क होता है और ऐसे में स्कूलों जैसे स्थान , कमरों और अन्य प्रकार की जरूरतों की अपेक्षा स्टडी सेंटरों से नहीं की जा सकती । ऐसे में हाईकोर्ट ने मान्यता वापस लेने के आदेश को खारिज करते हुए एनआईओएस को छूट दी कि वह चाहे तो नए सिरे से याची सेंटर को नोटिस जारी कर सकता है ।

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