NIOS D.el.ed.अधिकारियों ने कहा NCTE की गलती |अभ्यर्थी भुगत रहे खामियाजा। Nios D.el.ed. Validity |Upendra Kushwaha

NIOS D.el.ed.अधिकारियों ने कहा NCTE की गलती |अभ्यर्थी भुगत रहे खामियाजा। Nios D.el.ed. Validity |Upendra Kushwaha

शिक्षक शिक्षा नियामक के विवादों में घिरे होने से एनआईओएस द्वारा सम्मानित किए गए डिप्लोमा को मान्यता देने से इनकार कर दिया गया, जिसमें 12 लाख से अधिक सेवा स्कूल के शिक्षक, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने बुधवार को कहा की

शिक्षकों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय परिषद द्वारा लिया गया रुख NCTE) बिलकुल गलत था ”।

‘ एचआरडी मंत्रालय के पूर्व अधिकारियों ने एनसीटीई के फैसले पर उठाए हैं

,अधिकारी ने कहा , एनसीटीई की गलती एक अधिकारी ने कहा कि पूरे कार्यक्रम के दौरान इस बात जिक्र तो किया गया था कि यह सेवारत शिक्षकों के लिए है , लेकिन इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया था कि इस कोर्स को करने के बाद शिक्षक दूसरे स्कूलों में आवेदन नहीं कर पाएंगे । अधिकारी ने कहा कि यह एनसीटीई की गलती है । कोर्स को अमान्य बताया हाल ही में बिहार के निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों ने जब सरकारी भर्ती के लिए आवेदन किया तो बिहार सरकार ने एनआईओएस के डीएलएड के बारे में राय मांगी कि क्या यह योग्यता शिक्षक भर्ती के लिए अर्ह है ? इसके जवाब में एनसीटीई ने 18 महीने के डीएलएड कार्यक्रम को अमान्य करार दे दिया । इससे 13 लाख शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटक गई है । 18 महीने का कोर्स डीएलएड कोर्स 18 महीने का है । यह उन 15 लाख शिक्षकों के लिए था , जो अप्रशिक्षित थे और शिक्षा के अधिकार कानून के चलते उनकी नौकरी जाने का खतरा मंडरा रहा था ।

5 thoughts on “NIOS D.el.ed.अधिकारियों ने कहा NCTE की गलती |अभ्यर्थी भुगत रहे खामियाजा। Nios D.el.ed. Validity |Upendra Kushwaha”

  1. Kailash sachdev

    Yadi ncte ko course ke bare me pata nhi to kyu karavaya.
    Seedhe bole ki unke baap ke college se course nhi kiya to invalid ho gaya.kar lo manmani ham garibo ki baddva

    Aapki jade ukhar degi.

  2. sunil kumar sah

    शायद N I O S D.e l. E d पास पैसे खर्च नही किया है जबकि शिक्षक बनने के लिए पैसे खर्च करने है ।
    शिक्षा को गुणवत्ता से ज्यादा व या प र बना दिया है जो श र म की बात है ।ह

  3. sunil kumar sah

    कमसे कम शिक्षा का व्यापार नही होने चाहिए अन्यथा
    बच्चे सब आक्रमक और नैतिक विहीन होगे जहा भारत की सभ्यता – संस्कृति नष्ट हो जाएगी ।बात गुणवत्ता की है तो टी ई टी और नेट जैसे प्रतियोगिता लिए जा सकते न कि पैसे की खेल होनी चाहिए ।हमारे शासन अध्यक्ष कहते है कि सरकारी शिसटम को कार्पोरेट के तर्ज पर विकसित करने है जिससे सरकारी कार्य शीघ्रता से संचालित हो सके और दूसरी तरफ पैसे को गुणवत्ता पर भारी बना रहे है ।गुणवत्ता प्रतियोगिता से आते न कि भारी फिस बाली डिग्री से हा गरीबो को रोकने की बात हो तो अलग बात है ।
    आप सोचे कि 15 या 20 साल अध्ययन करने पर गुणवत्ता नही और एक या दो साल की भारी फिस वाली प्रशिक्षण की डिग्री पर गुणवान जबकि प्रशिक्षण सेवा के दौरान ही होने पर उच्च कोटि की गुणवत्ता हासिल की जा सकती है
    शिक्षा मे अधिक उम्र के शिक्षक होने चाहिए जहा बच्चे मे नैतिकता, आदर, सम्मान, दया, परोपकार, मर्यादा की वृद्धि की जा सकती अन्यथा बच्चे आक्रमक होगे ।शिक्षा मे जोश नही होश वाले शिक्षक चाहिए जबकि जोश वाले के लिए सेना, पुलिस आदि नौकरी है पर शायद सबको पैसे की पडी है ।

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